अपनी शेरो शायरी से पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान का परचम लहराने वाले मशहूर उर्दू शायर बशीर बद्र अब दुनिया में नहीं रहें। 28 मई 2026 को 91 वर्ष की उम्र में भोपाल स्थित अपने आवास पर उन्होंने आखिरी सांस ली। बशीर बद्र को उनकी ग़ज़लों और शायरी के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में उर्दू पढ़ाई। उन्होंने मुख्य रूप से उर्दू भाषा में, विशेषकर ग़ज़लें लिखीं। साहित्य के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें साल 1999 में 'पद्मश्री' सम्मान से नवाजा था। उन्होंने 1972 में शिमला समझौते के दौरान 'दुश्मनी जम कर करो' शीर्षक से एक शेर भी लिखा था, जो भारत के विभाजन पर आधारित है। उनके जाने की खबर से देश-विदेश में मौजूद उनके लाखों प्रशंसकों और चाहने वालों में मायूसी छा गई है। चलिए आज हम आपको उनकी कुछ बेहतरीन शायरी से रूबरू करवाते हैं।
बशीर बद्र की मशहूर शायरी
1- उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
2- दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों
3- कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता
4- न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
5- हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
6- मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी
किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी
7- ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मीं
पाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है
8- बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना
जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता
9- जिस दिन से चला हूँ मिरी मंज़िल पे नज़र है
आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा
10- कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से
ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो
11- यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं
मुझे गिलास बड़े दे शराब कम कर दे
12- हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं
उम्रें बीत जाती हैं दिल को दिल बनाने में
13- तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा
मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा
14- मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला
15- ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं
तुम ने मिरा काँटों भरा बिस्तर नहीं देखा
16- तुम मोहब्बत को खेल कहते हो
हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली